वन्दे मातरम्...........................जय जननी.........................
जब जीरो दिया मेरे भारत ने, दुनिया को तब गिनती आई
तारों की भाषा भारत ने दुनिया को पहले सिखलाई
देता ना दशमलव भारत तो यूँ चाँद पे जाना मुश्किल था
धरती और चाँद की दूरी का अंदाज़ा लगाना मुश्किल था
सभ्यता जहा पहले आई, पहले जन्मी है जहाँ पे कला
अपना भारत वो भारत है जिस के पीछे संसार चला
संसार चला और आगे बढ़ा, यूँ आगे बढ़ा, बढ़ता ही गया
भगवान करे ये और बढ़े, बढ़ता ही रहे और फूले फले
है प्रीत जहाँ की रीत सदा, मैं गीत वहाँ के गाता हूँ
भारत का रहनेवाला हूँ, भारत की बात सुनाता हूँ
वन्दे मातरम्...........................जय जननी.........................
मेरे प्यारे दोस्तो आज भी भारत मे नये नये आविष्कार
हो सकते है अगर भारत के मेधावी छात्रो का
अमेरिका जाने का मोह भन्ग हो जाऍ..............
वन्दे मातरम्...........................जय जननी.........................