अब्राहम लिन्कन और जार्ज वाशिन्गटन को तो
सब जानते है.....
प्यारे दोस्तो क्या आप भारत को \"सोने का शेर\"
बनाने को सपना देखने वाले अमर शहीद भाई
राजीव दीक्षित जी के बारे मे जानते है ?
मित्रो राजीव दीक्षित जी के परिचय मे जितनी
बातें कही जाए वो कम है ! कुछ चंद शब्दो मे
उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है !
ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते है
जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना
और समझा है !! फिर भी हमने कुछ प्रयास कर
उनके परिचय को कुछ शब्दो का रूप देने का
प्रयत्न किया है ! परिचय शुरू करने से पहले हम
आपको ये बात स्पष्ट करना चाहते हैं कि
जितना परिचय राजीव भाई का हम आपको
बताने का प्रयत्न करेंगे वो उनके जीवन मे किये
गये कार्यों का मात्र 1% से भी कम ही होगा !
उनको पूर्ण रूप से जानना है तो आपको उनके
व्याख्यानों को सुनना पडेगा ।
राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967
को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की
अतरौली तहसील के नाह गाँव में पिता
राधेश्याम दीक्षित एवं माता मिथिलेश कुमारी
के यहाँ हुआ था। उन्होने प्रारम्भिक और
माध्यमिक शिक्षा फिरोजाबाद जिले के एक
स्कूल से प्राप्त की !! इसके उपरान्त उन्होने
इलाहाबाद शहर के जे.के इंस्टीट्यूट से बी०
टेक० और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
(Indian Institute of Technology) से एम०
टेक० की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद राजीव
भाई ने कुछ समय भारत CSIR(Council of
Scientific and Industrial Research) मे
कार्य किया। तत्पश्चात् वे किसी Research
Project मे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए पी
जे अब्दुल कलाम के साथ भी कार्य किया ।
श्री राजीव जी इलहाबाद के जे.के इंस्टीट्यूट से
बी.टेक .की शिक्षा लेते समय ही “आजादी
बचाओ आंदोलन” से जुड गए जिसके
संस्थापक श्री बनवारी लाल शर्मा जी थे जो
कि इलहाबाद विश्वविद्यालय में ही गणित
विभाग के मुख्य शिक्षक थे ! इसी संस्था में
राजीव भाई प्रवक्ता के पद पर थे, संस्था मे
अनेक विद्वानो के साथ मिलकर राजीव भाई ने
अनेकों अनेक विषयो पर शोध कार्य किया ।
जो कि संस्था द्वारा प्रकाशित “नई आजादी
उद्घोष” नमक मासिक पत्रिका में प्रकाशित
हुआ करते थे।
इलाहबाद मे पढते हुए उनके एक खास मित्र
हुआ करते थे जिनका नाम है योगेश मिश्रा जी
उनके पिता जी इलाहबाद हाईकोर्ट मे वकील
थे !! तो राजीव भाई और उनके मित्र अक्सर
उनसे देश की आजादी से जुडी रहस्यमयी बातों
पर वार्तालाप किया करते थे ! तब राजीव भाई
को देश की आजादी के विषय मे बहुत ही गंभीर
जानकारी प्राप्त हुई ! कि 15 अगस्त 1947 को
देश मे कोई आजादी नहीं आई ! बल्कि 14
अगस्त 1947 की रात को अंग्रेज माउंट बेटन
और नेहरू के बीच के समझोता हुआ था जिसे
सत्ता का हस्तांतरण (transfer of power
agreement) कहते हैं ! इस समझोते के
अनुसार अंग्रेज अपनी कुर्सी नेहरू को देकर
जाएंगे लेकिन उनके द्वारा भारत को बर्बाद
करने के लिए बनाए गये 34735 कानून वैसे ही
इस देश मे चलेंगे !! और क्योकि आजादी की
लडाई मे पूरे देश का विरोध अँग्रेजी ईस्ट
इंडिया कंपनी के खिलाफ था तो सिर्फ एक
ईस्ट इंडिया कंपनी भारत छोड कर जाएगी और
उसके साथ जो 126 कंपनिया और भारत को
लूटने आए थी वो वैसे की वैसे ही भारत मे
व्यापार करेगी ! लूटती रहेगी ! आज उन विदेशी
कंपनियो की संख्या बढ कर 6000 को पार कर
गई है !! (इस बारे मे और अधिक जानकरी उनके
व्याख्यानों मे मिलेगी)।
एक बात जो राजीव भाई को हमेशा परेशान
करती रहती थी कि आजादी के बाद भी अगर
भारत मे अँग्रेजी कानून वैसे के वैसे ही चलेंगे
और आजादी के बाद भी विदेशी कंपनियाँ भारत
को वैसे ही लूटेंगी जैसे आजादी से पहले ईस्ट
इंडिया कंपनी लूटा करती थी ! आजादी के बाद
भी भारत मे वैसे ही गौ ह्त्या होगी जैसे अंग्रेजो
के समय होती थी।
तो हमारे देश की आजादी का अर्थ क्या है ??
तो ये सब जानने के बाद राजीव भाई ने इन
विदेशी कंपनियो और भारत में चल रहे अँग्रेजी
कानूनों के खिलाफ एक बार फिर से वैसा ही
स्वदेशी आंदोलन शुरू करने का संकल्प लिया
जैसा किसी समय मे बाल गंगाधर तिलक ने
अंग्रेजो के खिलाफ लिया था !! अपने राष्ट्र मे
पूर्ण स्वतंत्रता लाने और आर्थिक महाशक्ति
के रुप में खड़ा करना ही राजीव भाई के जीवन
का मुख्य उद्देश्य बन गया था।
राजीव जी ने रामराज्य की कल्पना को
समझना चाहा ! इसके लिए वे भारत अनेकों
साधू संतो, रामकथा करने वालों से मिले और
उनसे पूछते थे की भगवान श्री राम रामराज्य
के बारे क्या कहा है ?? लेकिन कोई भी उत्तर
उनको संतुष्ट नहीं कर पाया ! फिर उन्होने
भारत मे लिखी सभी प्रकार की रामायणों का
अध्यन किया और खुद ये हैरान हुए कि
रामकथा मे से भारत की सभी समस्याओ का
समाधान निकलता है ! फिर राजीव भाई घूम घूम
कर खुद रामकथा करने लगे और उनकी
रामकथा सभी संत और बाबाओ से अलग होती
वो सिर्फ उसी बात पर अधिक चर्चा करते
जिसे अन्य सत्य तो बताते नहीं या वो खुद ही
ना जानते है ! राजीव भाई लोगो को बताते कि
किस प्रकार रामकथा मे भारत की सभी
समस्याओ का समाधान निकलता है ! (इस बारे
मे अधिक जानकारी के लिए आप राजीव भाई
की रामकथा वाला व्याख्यान सुन सकते हैं)।
2001 से राजीव भाई योगऋषि स्वामी रामदेव
जी के संपर्क मे आए । राजीव भाई ने स्वामीजी
को देश की गंभीर समस्याओ और उनके
समाधानो से परिचित करवाया और विदेशो मे
जमा कालेधन आदि के विषय मे बताया और
2009 मे एक मंच से उनके साथ मिल कर
आंदोलन को आगे बढाने का फैसला किया ।
जिसका मुख्य उदेश्य लोगो
को अपनी विचार धारा से जोडना, उनको देश
की मुख्य समस्याओ का कारण और समाधान
बताना !! योग और आयुर्वेद से लोगो को
निरोगी बनाना और भारत स्वाभिमान आंदोलन
के साथ जोड कर 2014 मे देश से अच्छे लोगो
को आगे लाकर एक नई पार्टी का निर्माण
करना था।
जिसका उदेश्य भारत मे चल रही
अँग्रेजी व्यवस्थाओ को पूर्ण रूप से खत्म
करना, विदेशो मे जमा काला धन, वापिस लाना,
गौ ह्त्या पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाना, और
एक वाक्य मे कहा जाए ये आंदोलन सम्पूर्ण
आजादी को लाने के लिए शुरू किया गया था !!
राजीव भाई के व्याख्यान सुन कर मात्र ढाई
महीने मे 6 लाख कार्यकर्ता पूरे देश मे
प्रत्यक्ष रूप मे इस अंदोलन से जुड गए थे
राजीव भाई पतंजलि मे भारत स्वाभिमान के
राष्ट्रीय सचिव थे और जब आंदोलन तेजी से
बढ़ रहा था तभी एक दुर्घटना हुई और दुश्मनों
ने राजीव भाई को हमसे जुदा कर दिया ।