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दीनदयाल जी का आर्थिक चिंतन भारत की तत्कालीन वास्तविकताओं पर आधारित था । वे मनुष्य से मनुष्य के बीच बनावटी संबंधो से संतुष्ट नहीं थे ।उनका मानना था कि एक तरफ शोषण,गरीबी, भुखमरी हो और दूसरी तरफ अर्थतन्त्र का एकाधिकार हो वहाँ मनुष्य का सम्पूर्णविकास केवल छल है। #पंडित_दीनदयाल_जयंती

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