स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से भारत के पुनरुत्थान का जो सपना देखा था, उसकी ज्योति को जन-जन तक पहुँचाने, और बहुआयामी राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ने ‘एकात्म-मानववाद’ के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। #पंडित_दीनदयाल_जयंती