जिस तरह एक हिजड़ा खुद को नारी से भी सुन्दर दिखाने के लिये अति शृंगार कर अपने शरीर के साथ ही अन्याय कर जाता है !
उसी प्रकार नपुंसक मानसिकता के कुंठित अज्ञानी हिन्दु खुद को धर्म निरपेक्ष बताने के चक्कर में अपनी संस्कृति और धर्म के साथ अन्याय कर जाते हैं !