श्रीराम नाम संकीर्तन का महत्व:-
श्री राम जय राम जय जय राम ।
श्री राम जय राम जय जय राम ।
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे।
हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे।
राम राम हरे हरे राम राम हरे हरे राम राम हरे।
श्री श्री 10008 श्री राम नाम की महिमा कई महान संतों ने अनगिनत ग्रंथो में अपनी - अपनी क्षमतानुसार बताई है श्री राम चरित मानस में भी संतश्रीरोमणी महा कवि गोसांई श्री तुलसीदास जी भी कलयुगी जीवों को इस साधारण से लगने वाले राम नाम मंत्र की असाधारण अनंत शक्तियों के बारे में कई जगह समझाने का प्रयास किया है आज हम सुंदरकांड की एक चौपाई ले कर समझने का प्रयास करते हैं जिसमें श्री राम जी के परम भक्त श्री हनुमान जी रावण को बता रहे हैं कि मैं उन सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सर्व रक्षक, समर्थ श्री राम जी का दूत हूँ जिनके डर से स्वयं सबको खा जाने वाला काल भी डरता है :--
जांके डर अति काल डेराई।जो सुर असुर चरा चर खाई।
अर्थात राम नाम में ऐसी अनंत शक्तियां भरी हुई हैं कि जो काल देवता,राक्षस,ओर समस्त चरा चर को खा जाता है वह काल भी इस नाम के प्रभाव से थर - थर कांपता है।वर्तमान काल में जो करोना नाम की वैश्विक महामारी मौत की पर्यायवाची बन कर हमारे समक्ष खडी है वो इस काल का एक सुक्ष्म अंश है, आवश्यकता है मात्र विश्वास की जो कि आपत्तिकाल मेंअक्सर सब का डोल जाता है कमी राम नाम में नहीं है कमी है तो हमारे अटल विश्वास की, श्री महाराज जी निरंतर इस जाप को निस्वार्थ भाव से करने की प्रेरणा सभी सेवकों को देते हैं सतगुरु सच में सर्वज्ञ हैं अर्थात सब कुछ जानते हैं गोसांई श्री तुलसीदास जी ने भी मानस में कई जगह इस तरह का वर्णन किया है जिनके बारे में आगे भी जानने का प्रयास करते रहेंगे।
क्रमश:----