यारों का यार और भारत माता का वीर सपूत लेफ्टिनेंट विक्रम बत्रा का जन्म आज ही के दिन 1974 में पालमपुर में हुआ था। जिस समय दुश्मन ने कारगिल की पहाड़ियों पर कब्जा जमा लिया था, तब सेना की 12 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में तैनात थे। विक्रम बत्रा के नेतृत्व में टुकड़ी ने हम्प व राकी नाब स्थानों को जीता और इस पर उन्हें कैप्टन बना दिया था।
श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर महत्वपूर्ण 5140 पॉइंट को पाक सेना से मुक्त कराया। बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बाद भी कैप्टन बत्रा ने 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को कब्जे में लिया। कैप्टन बत्रा ने जब रेडियो पर कहा- ‘यह दिल मांगे मोर’ तो पूरे देश में उनका नाम छा गया। इसके बाद 4875 पॉइंट पर कब्जे का मिशन शुरू हुआ। तब आमने-सामने की लड़ाई में पांच दुश्मन सैनिकों को मार गिया। गंभीर जख्मी होने के बाद भी उन्होंने शत्रु की ओर ग्रेनेड फेंके। खुद जीवित नहीं रहे, लेकिन भारतीय सेना को मुश्किल जीत दिलाई। कैप्टन बत्रा को मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
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