जो स्थान (जंहा सुभाषचंद्र बोस जी भी स्वयं आते थे) (सात रोड निवास स्थान) लाला हरदेव सहाय जी के समय गौ सेवकों और क्रांतिकारियों को तैयार करता था वह स्थान आज विरान है, उनके पुत्रों और वंशजों को ये आभास तक नहीं होता कि वीर सहाय जी ने कितना बड़ा काम कर गए हैं।
इस देश में क्रांतिकारियों को हमेश भुलाता आया है ये दुर्भाग्यपूर्ण है।
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