Sushil Kumar Chaudhary @rajve.321bf Jul 2021
जाने कितने अनुभवों का है यही बस सार अंतिम, तोड़ना मत मन के रिश्तों का कभी भी तार अंतिम। जिंदगी की उलझनों से जूझ के जाना ये मैंने, न कोई भी जीत अंतिम न कोई भी हार अंतिम।