आरंभ
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जाने कितने अनुभवों का है यही बस सार अंतिम, तोड़ना मत मन के रिश्तों का कभी भी तार अंतिम।
जिंदगी की उलझनों से जूझ के जाना ये मैंने, न कोई भी जीत अंतिम न कोई भी हार अंतिम।

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