आरंभ
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अब ना मैं हूँ ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​।
ज़िन्दगी है तो नए खुशियों के मेले भी लग जाएंगे​, अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

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