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हिंदुस्तान के सभी शहरो को अगर आपके पास RTPCR रिपोर्ट हो तो ट्रेवल कर सकते है । इसका फायदा भी पर्यटन इंडस्ट्री को मिल भी रहा है बंद होने से कहीं एक बेहतर अहसास होता है खुला होना लेकिन इस खुले मे एक जगह जो अभी तक नहीं खुली है वो है चारधाम जो अभी तक बंद पड़ा है ०२ महीने का वक्त रह गया है उसके बाद अगले साल ही भगवान् केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन हो पाएंगे।
ये सिर्फ आस्था का विषय नहीं है बल्कि रोजी - रोजगार के लिए भी उस क्षेत्र के लिए खुलना बहुत जरूरी हो गया है । चारधाम के पूरे सर्किट में जो गाँव पड़ते है उनमे लगी हुई नुक्कड़ की दुकाने कोई अमीरों की नहीं होती है बल्कि ये वो लोग है जो इन ०६ महीने कमा के पूरे साल का इंतज़ाम करते है छोटे - छोटे कस्बो से हो के जाते श्रद्धालु इन गावों के लिए ईश्वर के भेजे हुए देवदूत की तरह है जिनकी वजह से इनके परिवार चलते है ।

सिस्टम में शामिल लोगों को उत्तराखंड के किसी भी हिस्से में पर्यटक के जाने से कोई परेशानी नहीं फिर चारधाम से क्यों ?
मसूरी , कॉर्बेट , नैनीताल या बिनसर है कहीं भी जाओ उज्जैन जाओ , नाशिक जाओ , कशी विश्वनाथ जाओ लेकिन बाबा केदार और बद्रीनाथ में रोक क्यों है बंदिशों के साथ ही जाने दीजिये लेकिन यात्रा शुरू करिये इस पूरे परिपथ में रहने वाले लाखों लोगों की दुवाये आपको मिलेंगी और श्रद्धालुओं का आशीर्वाद ।
आप रैली करे वो जायज , आप विरोध प्रदर्शन करे वो उचित और प्रदेश और देश के लाखों लोगो का घर पर्यटन से सुचारु रूप से चल सके उसके लिए अगर चारधाम को खोल दे वो गलत।
मैं कभी कभी सोचता हूँ एक ट्रेवल कंसलटेंट होने के नाते मेरे पास बहुत सारे विकल्प है लेकिन होटल , गाइड , खच्चर वाला , पंडित , छोटे - छोटे ढाबे ,टैक्सी और वो एजेंट जो केवल चारधाम ही करते थे उनके परिवार कैसे चलते होंगे । इस दर्द का अनुभव मुझे होता है लेकिन इसकी टीश अगर आप सत्ता और तंत्र में बैठे हुए लोग महसूस कर सके तो कहीं बेहतर हो ।
एक बेहतर उत्तराखंड के लिए चारधाम हर हाल में खुलना चाहिए मैं इसका पूर्ण रूप से सपोर्ट करता हूँ और सरकार से मांग है चारधाम जल्द से जल्द खोला जाए।

आपका
सुशील कुमार चौथरी

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