आरंभ
×
@s.par.195d3

जब तक जिया “मूँछों” पर ताव था,
गुलाम देश का वो इकलौता “आज़ाद” था

शत शत नमन

 टिप्पणियाँ 0
 बढ़िया 1
 लहरायें 0
 पसंदीदा 0




प्रयोग करें (Login)
~परिचर्चा से जुड़ें
@मित्र आमंत्रित करें

Get it on Google Play