हम आप और सभी लोग सामान्यतौर पर साबुन का उपयोग तो करते ही है परन्तु कुछ मानव ऐसे है जो इस धोखे में रहते है की साबुन से वह कोई लाभ प्राप्त कर रहे होंगे और साबुन से बिल्कुल रगड़ - रगड़ कर नहाते है। परन्तु वह साबुन के दुष्परिणामों से अनजान रहते है। हमारी त्वचा का सामान्य pH 5.5 होता है और साबुन का pH 10 जो कि हमारी त्वचा की pH से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता। अगर सामान्य भाषा में कहा जाए तो हमारी त्वचा की कोशिकाएं(Cells) अपना प्राकृतिक जल (Nucleus & Cytoplasm) त्याग देती है जिससे हमे अनेक चर्म रोग जैसे रुख पन, खुजली, लाल त्वचा, जलन, आदि रोगों का सामना करना पड़ता है। फिर आप डॉक्टर जाएंगे वह आपको कोई क्रीम देगा जिससे कुछ वक़्त तक आराम मिलता है लेकिन उसके दुष्परिणाम फिर उसके लिए 10 दवाइयां और उनके 10 साइड इफेक्ट और व्यक्ति इसी जंजाल में फसा रह जाता है। पुरातन काल में हमारे पूर्वज बिना साबुन उपयोग करे भी तंदरुस्त रहते थे। तो अब हमे इन विदेशी साबुन का उपयोग करने कि क्या आवश्यकता पड़ गई की हमने अपनी सेहत का ख्याल भी न किया। इसीलिए आज ही विदेशी साबुन क्या त्याग कर स्वदेशी अपनाए।
जय हिन्दी जय राजीव वाद