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@s.par.195d3

दोस्तो होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसका जन्म दाता आयुर्वेद अर्थात भारत है। होम्योपैथी आयुर्वेदिक सिद्धांतो पर ही काम करती है। पर दुर्भाग्य की बात यह है के भारत इसे अपने नाम नहीं कर पाया। और यूरोपीय चिकित्सक Hahnemann ने इस पद्धति का आविष्कार कर इसे पूरी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। होम्योपैथिक औषधियों का निर्माण पेड़ - पोधो, खनिज, जानवर तथा कुछ रसायनों से होता है जो कि पिछले हजारों वर्षों से कारगर साबित होती आ रही हैं। परन्तु वर्तमान समय में एलोपैथी चिकित्सा पद्धति इसका बहिष्कार करती है और इसे जूठा साबित करने में अपनी जी - जान लगा देती है।कहा जाता है के होम्योपैथी धीमा असर करती है, पानी बेचते है, मीठी गोलियां बेचते है - तो यह सब सरासर झूठ है। अगर सही औषधि सही पोटेंसी में सही वक़्त पर दी जाए तो दुनिया की ऐसी कोई बीमारी नहीं को होम्योपैथी से ठीक ना हों। होम्योपैथी का एक ही सबसे मेहेतपूर्ण सिद्धांत - लोहा लोहे को काटता है, उदहारण - अगर कोई व्यक्ति ज़्यादा कॉफी की ज़्यादा खुराक से रात में नींद कम आती है परन्तु उसी कॉफी की बहुत छोटी खुराक दी जाए तो नींद आती है। होम्योपैथी औषधि में इतनी शक्ति है के मातृ सुगंध लेना औषधि लेने के सामना होती है ।एलोपैथी के सामान होम्योपैथी के इतने घातक दुष्परिणाम नहीं है।होम्योपैथी और आयुर्वेद की प्रशंसा करें उतना कम है।
धन्यवाद

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