महा सत्यानाशी 💀☠👹👹👹👺👺💀☠ है काम विकार (ब्रह्मचर्य का खण्डन)
🔰प्रश्न: मुहँ काला करने का क्या अर्थ है?
जब भी हम कोई ऐसा कर्म करते हैं जिससे आत्मा की पवित्रता अर्थात उर्जा कम हो जाए उसका प्रभाव हमारे मुख से दिखना शुरु हो जाता है, तेज समाप्त हो जाता, सुन्दरता नष्ट हो जाती है, पवित्र आकर्षण व मसूमियत धूमिल होने लगती है, उम्र से बड़े लगने लग जाते हैं यह सारे लक्षण आत्मा की पवित्रता कम होने के हैं,
जिस आत्मा में पवित्रता अर्थात उर्जा अधिक होती है वह आत्मा उम्र से छोटी, सुन्दर, मासूम व बहुत ही आकर्षण भरी होती है इसका उदाहरण हैं हमारे देवी देवतायों के चित्र, ब्रह्मा के सिवाए कोई भी देवता ही वृद्ध अवस्था नहीं दिखाई जाती है क्यों?
क्योंकि जब आत्मा सम्पूर्ण पवित्र हो तो शरीर की ageing process बहुत धीमी हो जाती है, आयु बढ़ जाती है!
इसलिए वो कर्म जिससे आत्मा की पवित्र उर्जा नष्ट होती हो उसे करना अपना "मुहँ काला करना है " क्योंकि विकारों में सबसे हानिकारक विकार काम विकार है ,
क्योंकि इससे आत्मा की सबसे अधिक उर्जा नष्ट होती है इसलिए काम विकार में गिरने को मुहँ काला करना कहते हैं पर काम को जीत लो और अन्य विकार भले रहें, नहीं! किसी भी विकार में गिरने से मुहँ काला होता है क्योंकि उससे आत्मा की पवित्रता नष्ट होती है जिसका प्रभाव शरीर में दिखता है