आरंभ
×

अगर किसी के महिला के गर्भवती होंने के बाद बच्चे के जन्म होने के पूर्व ही विभिन्न कारणों से गर्भपात (मिस कैरिज) हो जाता हो तो इस विषय में आयुर्वेद और ज्योतिष की वैसी महिलाओ को यह सलाह है कि वह राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करे या करवाये तथा सम्मी पेड़ की जड़ को लाकर लाल धागे से पेट पर बांधे।

आयुर्वेद के अनुसार गर्भ धारण से बच्चे के जन्म लेने के बिच लगने वाला समय 9 माह और 9 दिन का होता है।
आइये आयुर्वेद सिद्धान्त के अनुसार प्राकृतिक के इस 9 महीने 9 दिन गर्भ मे बच्चे के पलने के पीछे छुपे वैज्ञानिक आधार को जानते है।

आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार हमारे ब्रह्माण्ड में स्थित 9 ग्रह ही हमारी पृथ्वी की सारी गतिविधियों को प्रभावित एवं संचालित करती है। और यही कारण है कि गर्भावस्था में गर्भ मे बच्चा 9 महीने 9 दिन रहता है । इसका एक यही वैज्ञानिक आधार है । हमारे ब्रह्मांड के 9 ग्रह अपनी अपनी किरणों के प्रभाव से गर्भ मे पल रहे बच्चे के अंगो उपांगों को विकसित करते है ।

ब्रह्माण्ड में स्थित 9 ग्रहों में से प्रत्येक ग्रह अपने स्वभाव के अनुरूप बच्चे के शरीर के भागो को विकसित शक्ति सम्पन्न करता है ।

अगर इनमे से कोई ग्रह गर्भ मे पल रहे बच्चे के गर्भ काल के समय कमजोर होता है तो उसको ज्योतिषीय उपचार उपाय से ठीक किया जा सकता है ।

गर्भ धारण करने से लेकर 1 महीने तक शुक्र ग्रह का प्रभाव उस गर्भ पर रहता है । अगर गर्भावस्था के समय शुक्र कमजोर है गर्भस्थ शिशु में सुंदरता की कमी रहेगी। ऐसी स्थिति हो तो उसके शुक्र को ज्योतिषीय उपचार के द्वारा मजबूत करना चाहिए । अगर शुक्र मजबूत होगा तो बच्चा बहुत सुंदर होगा तथा उस समय स्त्री को चटपटी चीजे खानी चाहिए।

यदि शुक्र कमजोर हो तो ऐसी स्थिति में शुक्र के नाम का दान न करे । अगर दान किया तो शुक्र और कमजोर हो जाएगा ।

दान सिर्फ उसी ग्रह का करे जो पापी और क्रूर हो और उसके कारण गर्भपात का खतरा हो ।

गर्भावस्था के दौरान गर्भस्थ शिशु पर दूसरे महीने मंगल ग्रह का प्रभाव रहता है । इसलिए गर्भवती महिलाओं को दूसरे महीने मीठा ज्यादा खा कर मंगल को मजबूत करना चाहिए। यह ग्रह अपने स्वाभाव के अनुरूप शिशु में साहस की शक्ति का संचार करता है। इस समय लाल वस्त्र ज्यादा धारण करना चाहिए।

गर्भधारण करने के बाद गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु के ऊपर तीसरे महीने गुरु ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु की आयु और विवेक का निर्माण करता है। इसलिए इस तीसरें महीने गर्भवती महिला को दूध और मीठे से बनी मिठाई या पकवान का सेवन ज्यादा करना चाहिए तथा पीले वस्त्र ज्यादा धारण करने चाहिए।

गर्भ धारण करने के बाद गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु पर चौथे महीने सूर्य ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु में बुद्धि को कुग्रास करता है और पाचकाग्नि का विकास करता है। इसलिए गर्भवती महिला को गर्भ के चौथे महीने में फलों आदि के रसों का अधिक सेवन करना चाहिए तथा महरून वस्त्र ज्यादा धारण करना चाहिए।

गर्भ धरणकरने के पश्चात गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु पर पांचवे महीने चंद्र ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह शिशु के अंदर विचार शक्ति और चंचलता का विकास करता है। इसलिए गर्भवती महिला को इस महीने दूध और दही तथा चावल तथा सफ़ेद चीजों का सेवन ज्यादा करना चाहिए तथा ज्यादा से ज्यादा सफेद वस्त्र धारण करे ।

गर्भ धारण करने के बाद महिला के गर्भस्थ शिशु पर छटे महीने शनि ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु में वीरता, विद्वता और क्रोध आदि जैसे गुणों का विकास करता है। इसलिए गर्भवती महिला को इस छठे महीने में अधिक से अधिक कसैली चीजों का अधिक सेवन करते हुए कैल्शियम और रसों का अधिक सेवन करना चाहिए तथा आसमानी वस्त्र ज्यादा धारण करने चाहिए।

गर्भ धारण करने के बाद गर्भवती महिला के गर्भ में स्थित गर्भस्थ शिशु पर सातवें महीने बुध ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु में आलस्य, कामुकता और अभिमान आदि गुणों का विकास करता है। इसलिए गर्भवती महिला को अपने सातवें महीने में फलों का जूस और फलों का खूब सेवन करना चाहिए तथा हरे रंग के वस्त्र ज्यादा से ज्यादा धारण करना चाहिए।

गर्भ धारण करने के बाद गर्भवती महिला के गर्भस्त शिशु पर आठवें महीने फिर से राहु ग्रह का प्रभाव रहता है। यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु में मंदमति, चौकन्ना पन आदि का विक्स करता है। इसलिए इस महीने में गर्भवती महिला को ज्यादा से ज्यादा दूध दही चावल और सफेद चीजों का उपयोग किया जाना चाहिए तथा ज्यादा से ज्यादा सफेद वस्त्रों का उपयोग करना चाहिए।

गर्भ धारण करने बाद गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु पर नौवें महीने केतु ग्रह का प्रभाव रहता है । यह ग्रह अपने प्रभाव से शिशु में रोग प्रतिरोधक शक्ति जैसे गुणों का विकास करता है। इसलिए इस समय में गर्भवती महिला को फलों एवं उनके रसों का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए तथा मैरून वस्त्र धारण काने चाहिए।

इस दौरान अगर कोई ग्रह नीच राशि गत भ्रमण कर रहा है तो उसका पूरे महीने यज्ञ करना चाहिए ।

गर्भ में स्थित शिशु जितना ही ज्यादा ग्रहों की किरणों से तपेगा उतना ही बच्चा महान और मेधावी होगा ।

जैसी एक मुर्गी अपने अंडे को ज्यादा हीट देती है तो उसका बच्चा मजबूत पैदा होता है । अगर हीट कम देगी तो उसका चूजा बहुत कमजोर होगा । उसी प्रकार माँ का गर्भ ग्रहों की किरणों से जितना तपेगा बच्चा उतना ही मजबूत होगा ।

 टिप्पणियाँ 0
 बढ़िया 3
 लहरायें 0
 पसंदीदा 0




प्रयोग करें (Login)
~परिचर्चा से जुड़ें
@मित्र आमंत्रित करें

Get it on Google Play