समझिए और समझाईये !
पहचानिये गद्दार को !!
-ये दो खबरें देखिए
एक तरफ सिंगुर है जहां से ममता बनर्जी ने टाटा की फैक्ट्री को भगा दी।
अब सिंगुर के किसान सरकारी 2 रुपए किलों के चावल पर जिंदा हैं,
सारे दिन अपने खेतों से फैक्ट्री का मलबा निकालते हैं।
फैक्ट्री लगने के बाद जो बैंक खुले थे वो सब धीरे-धीरे बंद हो गए,
अब सिंगुर नंदीग्राम के लोगों का कहना है कि इससे अच्छा तो नक्सली बन जाते।
दूसरी तरफ गुजरात का साणंद है...
सिंगुर से निकाले जाने के बाद मोदी जी के कहने पर टाटा की फैक्ट्री यहां लगाई गई थी,
टाटा के बाद यहां फोर्ड, मारुति, जनरनल मोटर्स, हीरो मॉटोकोर्प जैसी कंपनियों के दर्जन प्लांट लग चुके हैं.
साणंद की जमीन की कीमत आसमान छू रही हैं और साणंद भारत ही नहीं एशिया का सबसे बड़ा ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब बन चुका है.
ये सब सिंगुर में होता अगर सिंगुर के लोगों में रत्ती भर अक्ल होती।
ये 10 दिन का आंदोलन, ये क्रांतिकारी बनने की चुल
ये सरकार को दिखा देने की आग, इसके चक्कर में अपनी पूरी पीढ़ियां बर्बाद कर ली।
और ये नेता इन्हें जरा शर्म नहीं आती
ये मिल बंद करवा कर मजदूर का भला करते हैं
यूनिवर्सिटी बंद कराके छात्रों का
और खड़ी फसल पर टैक्टर चलवा कर किसान का
मुंबई में कम्युनिस्टों ने एक साथ 80 कपड़ा मिल बंद करा दी और वो इस बात पर गर्व करते हैं
ये शहर के शहर उजाड़ देते हैं
बुलट ट्रैन नहीं आनी चाहिए,