आरंभ
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*पता नहीं किस सज्जन की रचना है लेकिन बड़ी व्यंगात्मक भाषा में बहुतही बढ़िया लिखी है*।

👇👇👇👇👇

*तुम मायावती सी निर्धन,*
*मैं राहुल सा समझदार प्रिये।*
*महाराष्ट्र के गठबंधन सा, है तेरा मेरा प्यार प्रिये।।*

😊😊

*मैं आरएसएस का उग्रवाद,*
*तुम आईएसआई का शान्तरूप।*
*मैं मंदिर का कर्णकटु शंखनाद,*
*तुम अज़ान सी मधुर झंकार प्रिये।।*

😜😜

*तुम व्हाट्सएप, मैं टेलीग्राम,*
*तुम नेट बैंकिंग, मैं मनीऑर्डर।*
*तुम बुलेट ट्रेन सी द्रुतगामी,*
*मैं खच्चर-ऊंट सवार प्रिये।।*

😍😍

*सोनिया सी त्यागमूर्ति हो तुम,*
*मैं हूँ अटल सा पद-लोलुप।*
*मैं नाम का पीएम मनमोहन,*
*तुम ही असली सरकार प्रिये।।*

😂😂

*तुम रेणुका की सी स्मित मंद,*
*और मैं स्मृति का अटृाहास।*
*तुम मर्यादित भाषा निरुपम की,*
*मैं आडवाणी वाचाल प्रिये।*

😉😉

*तुम गगनचुम्बी पेट्रोल भाव,*
*मैं इंटरनेट सा सस्ता हूँ।*
*लेकिन हम दोनों से ही हैं,*
*इस दुनिया की रफ्तार प्रिये।।*

😂😂

*तुम लालू जैसी पशुप्रेमी,*
*निर्दोष टूजी, सीजी बोफोर्स*
*तुम चिदम्बरम सी ईमानदार,*
*मुझसे लज्जित भ्रष्टाचार प्रिये।l*

😳😳

*तुम सेकुलर कांग्रेस जैसी,*
*मैं साम्प्रदायिक बीजेपी सा।*
*तेरी काली करतूतों का,*
*मैं ढोता सर पर भार प्रिये।।*

😏😏

*तुम दिग्विजय-थरूर चरित्रवान,*
*मैं योगी-मोदी सा पतित।*
*तुम औवेसी जैसी देशभक्त,*
*मैं द्रोही गुनहगार प्रिये।।*

☺☺

*तुम मासूम हो पत्थरबाजों सी,*
*मैं तुझसे पिटता क्रूर सैनिक।*
*तू वोट बैंक का स्ट्रांग रूम,*
*मैं तेरे आगे लाचार प्रिये।।*

😔😔

*तुम वेटिकन का लव लेटर,*
*तुम देवबंद का फतवा हो।*
*मैं खामोशी संत महंतों की,*
*और मिथ्या गीता सार प्रिये।।*

🤩🤩

*मैं कश्मीरी पंडित अतिक्रमी,*
*तुम पीड़ित निरीह रोहिंग्या हो।*
*मैं रिफ्यूजी कैंप के हूँ काबिल,*
*तुम भारत की हकदार प्रिये।।*

😍😍

*तुम भारत गौरव जिन्ना हो,*
*मैं भगतसिंह आतंकवादी।*
*भारत की आज़ादी के श्रेय पर,*
*है तेरा ही अधिकार प्रिये।*


*One of the sarcastic poem !!*. Sunil ....

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