*पता नहीं किस सज्जन की रचना है लेकिन बड़ी व्यंगात्मक भाषा में बहुतही बढ़िया लिखी है*।
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*तुम मायावती सी निर्धन,*
*मैं राहुल सा समझदार प्रिये।*
*महाराष्ट्र के गठबंधन सा, है तेरा मेरा प्यार प्रिये।।*
😊😊
*मैं आरएसएस का उग्रवाद,*
*तुम आईएसआई का शान्तरूप।*
*मैं मंदिर का कर्णकटु शंखनाद,*
*तुम अज़ान सी मधुर झंकार प्रिये।।*
😜😜
*तुम व्हाट्सएप, मैं टेलीग्राम,*
*तुम नेट बैंकिंग, मैं मनीऑर्डर।*
*तुम बुलेट ट्रेन सी द्रुतगामी,*
*मैं खच्चर-ऊंट सवार...
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