●••••°°° गवहा संक्रान्ति °°°••••●
आइ रातिक भोरहरबा मे संक्रमण होयत आ काल्हि यानि १८ अक्टूबर २०२१ , सोमदिन ।
ई पावनि कातिक मासक तुला राशिक संक्रान्ति क मनाओल जाइत अछि ।
आजुक दिन गृहस्थ लोकनि सभ खेतक आरि पर(जाहि मे धान रोपल रहय) घुमि-घुमि कऽ कहैत छथिन जे .....
"*सैर बराबर फूटिह धान"*
पहिले अगहनियाँ धान अर्थात जे धान अगहन मे कटाइ छलैक ( जेना - सेहमाना , सतरिया , गहहूमा , चचनचूड़ आदि) ओहि मे एहि दिन गम्हरि दैत छलैक से मान्यता छल। एहि दिन सँ कार्तिक मासक कृत्य सेहो आरम्भ होइत अछि ।(जेना - कातिक स्नान , धातरिक पूजा , गंगा स्नान , कल्पवास आदि)
एहि दिन उदय सँ पूर्वहि गोसाउन घर होइत छथि । चीनवार सँ लऽ ओसारा तक कोजगरे दिन जकाँ अरिपन देल रहैछ । अरिपनक शेषमे चिनवार पर अष्टदल अरिपन देल रहेछ जाहि पर पीढ़ी पर सिन्दर - पिठार लागल तामा राखल रहैछ । पीढ़ीक चारू कोन पर घी के दीप जरैत रहैत अछि । तामामे एक गोट चानीक रुपैया , दुबि , धान वा गम्हरी , डाँट लागल पान , गोटा सुपारी रहैत छैक । तखन तीन बेर जल सँ , तीन बेर सिन्दुर सँ आ तीन बेर आँचर सँ ई कहि - कहि ,
*"अन्न धन लक्ष्मी घर जाइ , दारिद्रय बाहर जाउ"* ।
ई कहि गोसाउन के घर कऽ पूजा कएल जाइछ आ तहन अरिपन के मेटा देल जाइत अछि ।
संक्रान्ति दिन सूर्योदयक उपरान्त आङ्गन मे तीन आँगुर सँ एक पाँती पाँच - पाँच गोट गोल गोल अरिपन दैत छथि ओहि पर सिन्दुर लगा दैत छथि । तहन कुमारि कन्या नव वस्त्र पहीर पूब मुँहे पाँतीमे पाँच - पाँच गोट चीपड़ी पथैत छथि । ओहिमे सिन्दुर पिठार लगबैत छथि । ओकरा उपरमे कुम्हरक फूल वा गेनाक फूल साटि दैत छथि । ओकर बाद गौड़ीक पूजा करैत छथि। यैह चिपड़ी नवान्न दिन अग्नि - स्थापनक कार्यमे अबैत अछि ।
कुमारि कन्यासँ पथेबाक ई उद्देश्य छैक जे आगू गृहस्थीमे ओकरा जारनिक अभावमे चिपड़ीयो पाथय परय , बच्चाक मल - मूत्र उठाबय पड़ै , अपना से श्रेष्ठक सुविधा हेतु कार्य करय पड़े तऽ कष्टक अनुभव नहि होइ ।
मिथिलामे पाँच - सात वर्षक अवस्था सँ कुमारि कन्या बड उत्साहक संग है । पावनि करैत अछि । यदि अपना घरमे कुमारि कन्या नहि रहैत छैक तऽ लोक अरोसिया - परोसियाक बेटी सँ ई कार्य करबैत अछि । नवान्न दिन एहि चिपड़ीक बड़ महत्त्व छैक जे नवान्न प्रकरणमे देल जाएत ।
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