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हम पुण्य करते हैं क्यों करते हैं? हम यह सोचते हैं इस पुण्य से हमारा लोक के साथ परलोक भी सुधरेगा। तो हमारे पुण्यों में हमारी इच्छा जुड़ जाती हैं । अब सवाल यह है कि कई बार ऐसी जगह मदद करनी होती है जो काउंट नहीं होगी तो फिर क्या उसका लाभ मिलेगा? हम सोचते हैं कि हमें कोई दिक्कत ना हो, हम से जुड़े लोगों को कोई दिक्कत ना हो, हमारा परलोक भी सुधर जाए, इसीलिए हम उन्हें करते हैं। लेकिन ऐसा सहयोग जो आपने किया और सचमुच आप भूल जाओ आपको याद ही ना रहे बस उतना ही प्रकृति आपके पुण्य में काउंट करती है। वही आपकी हाजिरी है, यानी कोई भी अच्छे से अच्छा किया गया कार्य है जिसे आप करके भूल गए हो, सचमुच आपको याद नहीं हो प्रकृति उसे आपके सत कर्मों से जोड़ देती है या यूं समझो कि आपकी मदद को कोई जब नहीं देखता तो प्रकृति देखती हैं । यही से आपके ज्ञान का उदय होता है और आप परमार्थ के रास्ते पर चलने लगते हैं प्रकृति आपकी मदद करने लगती है ।। क्या ऐसे क्षण आते हैं जीवन में अगर आएं तो उनका भरपूर इस्तेमाल करें । साधु साधु साधु।

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