आरंभ
×

मां ऐसा शब्द। जिससे बच्चा पहली बार म,म करके ही बोलने की क्रियाएं सीखता है । मां का वात्सल्य और प्रेम को शब्दों में बयान करना असंभव सा कार्य है। बड़ा अच्छा लगता है जब बड़ा होने के बाद हम मां के आंचल में कभी आकर बैठे , कभी उसके हाथ का बनाया भोजन ग्रहण करें। क्योंकि ऐसा करने से उस ईश्वरी सत्ता का राज इतनी आसानी से समझ आने लगता है । बात यह है इस प्रेम को हम क्या किसी पैमाने से नाप सकते हैं? जवाब है ,, जी नहीं । इस महमारी के दौरान मां की संगति ,मां के सानिध्य का,, प्रेम मां का वात्सल्य सभी रस देखने को मिल गए ।। आज भी मां पुराने 50 वर्षों 60 वर्षों का जीवन बड़ी सादगी और प्रकृति के साथ जीती है । मां के पास रहकर यहां मुझे पता चला कि दिन में 3 से 4 घंटे अगर सुबह हम पूरे घर की लाइट ऑफ करके प्रकृति के साथ रहना शुरू करें तो कितना कुछ क्रिएटिव होने लगता है । मां का रोज़ नियम है सुबह लगभग 5:00 या 6:00 बजे से 10:00 या 11:00 बजे तक सारी घर की लाइट बंद रहेगी अब सभी प्राकृतिक तरीके से ही क्रियाकलाप निपटाएंगे। मुझे पता चला हमारे घर में दो फ्रिज 1होते हुए मां ने पिछले 10 वर्षों से बंद करके रखे हैं कभी कोई चीज रात को अगर खाने वाली है, जो बच गई है तो मां का तरीका है उसे पानी भरे बर्तन में रख दो सुबह तक सुरक्षित रहेगी कोई जीव भी उसको झूठा ना कर पाएगा। चारों तरफ पानी होना चाहिए, यह भी देखा हम

 टिप्पणियाँ 0
 बढ़िया 2
 लहरायें 0
 पसंदीदा 0




प्रयोग करें (Login)
~परिचर्चा से जुड़ें
@मित्र आमंत्रित करें

Get it on Google Play